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Chapter 1,2

एक कोर्ट रूम में बैठे लोग बहुत धीमी आवाज में एक दूसरे से कह रहे थे बताओ भला क्या टाइम आ गया है 18 साल का लड़का अपनी ही मां के साथ ऐसी हरकत छी छी कितना घटिया लड़का है ऐसे लड़के को तो बीच चौराहे पर जिंदा जला देना चाहिए

वो लड़का चुपचाप खड़ा हो कर सामने बैठे अपने मॉम और डैड को देख रहा होता है उसकी आंखों में खालीपन था जैसे सारी उम्मीद ही खत्म हो गई हो उसे देख कर ये कह पाना बहुत मुश्किल था कि वो लड़का इस तरह का कोई भी क्राइम कर सकता है

तभी वहां पर जज के कहे हुए शब्द गूंजते है अदालत द्रांश सिंह रानावत को अपनी स्टेप मदर के साथ रेप करने की कोशिश करने और पिता के दोस्त के मर्डर के इल्जाम में उम्र कैद की सजा सुनाई जाती है

जज के इन शब्दों को सुनते उस लड़के की आँखें भर जाती है वो वही विटनेस बॉक्स में घुटनों के बल गिर पड़ता है और अपनी आंखों को बंद कर लेता है उसकी आंखों में भरे आंसू बह कर उसके गाल पर आ जाते है वो वहीं चीख चीख कर रोने लगता है और रोते हुए कहता है डैड मैने कुछ नहीं किया "I swear मैने कुछ नहीं किया मैं मॉम की कसम खा कर कहता हूं मैने ऐसा कुछ नही किया प्लीज़ मेरा बिलीव करिए डैड प्लीज़

पर उसके डैड उसकी बात नहीं सुनते और अपनी बीवी यानी द्रांश की स्टेप मॉम मालती को लेकर वहां से चले जाते है और द्रांश वहीं घुटनों के बल पड़े हुए रोता चीखता रहता है पुलिस वाले उसके पास आ कर उसे जबरदस्ती खींच कर ले जाने लगते हैं मीडिया भी इस न्यूज को रिकॉर्ड कर रही थी हर चैनल पर यही न्यूज थी जहां उसे एक दरिंदा खूनी और न जाने किन किन शब्दों का यूज़ कर उसे क्रिमिनल का नाम दिया जा रहा था

पुलिस वाले उसे कोर्ट रूम से बाहर लेकर आते है वहां मौजूद मीडिया उसे घेर लेती है पुलिस वाले जैसे तैसे उसे लेकर वहां से निकल जाते है पर वो उसे पुलिस वैन तक ले जा पाते उससे पहले एन जी ओ की वूमेन जो कि वहां मौजूद होती है वो पुलिस वालों का रास्ता रोक द्रांश की टी शर्ट का कॉलर पकड़ कर उसे 2,3 थप्पड़ मारती है पुलिस वाले उन लोगों को रोकने की कोशिश करती है

पर वो औरते द्रांश को गालियां देते हुए उसके मुंह पर कालिक पोत देती है उसे जूतों की माला पहना देती है इसी के साथ वहां भीड़ में मौजूद लोग गुस्से में भड़क कर द्रांश को मारने लगते है

पुलिस बहुत मुश्किल से भीड़ पर काबू पा द्रांश को उनके बीच से निकाल कर ले जाती है लेकिन अब द्रांश की हालत काफी खराब हो जाती है पुलिस वाले उसे ले जाकर वैन में बैठा कर जेल ले जाते है

द्रांश जो कि कुछ टाइम पहले रो रहा था अपनी रिहाई चाहता था पर अब वो एकदम शांत हो गया था उसे खुद में एक खालीपन सा महसूस हो रहा था उसे खुद से नफरत हो रही थी उसे ऐसा लग रहा था जैसे अपने बचपन से अभी तक उसने जो कुछ सहा था वो सब कुछ नहीं था जैसा उसके साथ अभी हो रहा था और उसे ये बात अच्छे से पता थी कि ये सब किसने किया और क्यों

पर वो चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहा था क्योंकि उसके पास खुद को निर्दोष साबित करने के लिए न ही कोई सबूत था और न ही कोई गवाह और उसकी सबसे बड़ी उम्मीद उसके डैड ने भी उसका साथ छोड़ दिया

द्रांश के माइंड में अभी कोर्ट के बाहर जो कुछ हुआ वो किसी रील की तरह बार बार उसके दिमाग में चल रहा था उसकी आंखों के सामने बार बार वो तस्वीर आ रही थी कि कैसे उन औरतों ने उसके मुंह पर कालिख लगाई और वहां मौजूद भीड़ कैसे उसकी जान लेने को उतावली थी और इसी के साथ उसे याद आता है किस तरह से उसके अपने बाप ने उससे मुंह फेर लिया था एक बार भी उसने अपने बेटे पर यकीन करना जरूरी नहीं समझा

एक बार भी उसकी बात नहीं सुनी सबकी तरह उसने भी सामने दिखाए जा रहें झूठे दिखावे पर यकीन कर अपने बेटे की जिंदगी की बलि चढ़ा दी जो कि अभी सिर्फ 18 साल का था उसके सपनों उसकी हर खुशी उसकी मासूमियत को एक झूठे केस के चलते सजा दे दी गई

द्रांश जिसकी आंखों में अब आंसू तो नहीं थे पर कुछ तो था शायद एक गुस्सा उसके गुस्से में छुपा दर्द था उसके अंदर एक दर्द का सैलाब उमड़ रहा था

कुछ घंटे बाद वो वैन एक जगह रुकती है वैन के रुकते कॉन्स्टेबल वैन से उतर कर द्रांश को वैन से बाहर निकालते है और उसे ले जाकर लॉक अप के अंदर ढकेल देते है उस लॉक अप में पहले से एक और शख्स बैठा होता है जो कि अपने सामने पड़े उस लड़के मतलब द्रांश को देख रहा होता है जो कि दर्द में पड़ा कराह रहा था उसके इस दर्द इस तड़प को समझने वाला कोई नहीं था उसकी आँखें बंद थी उसकी बॉडी पर जगह जगह चोट के निशान थे कहीं कहीं से तो खून भी रिस रहा था

पर उसे तो जैसे कोई होश नहीं था उसे देख कर लग रहा था जैसे वो गहरी नींद में सो रहा हो तभी उसके कान में एक आवाज सुनाई देती है

द्रांश बेबी अब उठ जाओ मम्मा आप को जगा रही है ये आवाज किसी और की नहीं द्रांश की रियल मॉम की थी तभी पीछे से एक और आवाज आती है अरे यार सोने दो न मेरे बेटे को बेचारा रोज तो स्कूल जाने के लिए जल्दी उठता है एट लिस्ट संडे को तो उसे अच्छे से सोने दो और तुम मेरे साथ चलो उसे अपने तरह से संडे एंजॉय करने दो हम अपनी तरह से संडे एंजॉय करते है ये कह कर द्रांश के डैड अभय सिंह रानावत द्रांश की मॉम साधना का हाथ पकड़ अपनी तरफ खींच लेते है

Chapter 2

द्रांश के डैड अभय सिंह रानावत द्रांश की मॉम साधना का हाथ पकड़ कर अपना तरफ खींच लेता है

साधना थोड़े गुस्से से अभय से अपना हाथ छुड़ाते हुए कहती है मिस्टर रानावत आपको जरा भी शर्म नहीं है यहां हमारा बेटा सो रहा है

अभय मुझे दिख रहा है कि हमारा बेटा यहां है पर वो अभी सो रहा है और वो अभी इन सब बातों से अंजान है साधना हां अंजान है पर जैसी आपकी हरकते है वो दिन दूर नहीं जब वो समय से पहले बड़ा हो जाएगा खैर आप यहां से जाए और जा कर रेडी हो जाए आज द्रांश मम्मा और पापा सब साथ में घूमने जाएंगे

ये सुनते ही द्रांश जल्दी से उठ कर बैठ जाता है और खुशी से चहकते हुए कहता है रियली मम्मा आज हम घूमने जा रहे

साधना भी स्माइल करते हुए नहीं बेटा ये तो आप को जगाने की निंजा टेक्निक है

द्रांश का अब मुंह बन जाता है वहीं उसके डैड जोर जोर से हंसने लगते है और हंसते हुए कहते है कुछ भी कहो ये लेडीज न बहुत ही चालाक होती है देखा बेटा कैसे अपनी बात मनवा लेती है

द्रांश थोड़ा गुस्से से कहता है मम्मा मै आप से बात नहीं करूंगा

साधना ठीक है मत करो फिर वो अभय की तरफ देख कर कहती है मिस्टर रानावत आप अभी तक यहीं खड़े है चलना नहीं है आपको घूमने

द्रांश साधना की बात सुन कर मम्मा सच सच बताओ न क्या हम सच में घूमने जा रहे

साधना स्माइल करते हुए बेड पर बैठ कर द्रांश को अपनी गोद में लेकर कहती है बेटा आप मै और आपके डैड हम तीनों साथ में घूमने जा रहे चलो अब जल्दी से तैयार हो जाओ फिर सब साथ में घूमने चलते है

कुछ देर बाद द्रांश और उसके पापा कार के पास खड़े साधना का वेट कर रहे होते है

साधना के आते अभय कहता है यार कितना लेट करती हो तुम इतना कौन लेट होता है रेडी होने में अगर किसी की शादी में जाना हो तुम्हारे रेडी होने के चक्कर में उसके बच्चों की शादी में पहुंचेंगे

साधना भी उसकी बात सुन कर हंसते हुए कहती है हां अब मै आप की तरह बंदर के जैसा कूद कूद कर रेडी नहीं हो सकती न ये सुनते द्रांश जोर जोर से हंसने लगता है और उसका साथ देते हुए साधना भी हंस रही होती है

अभय उन्हें इस तरह खुद पर हंसते हुए देख कर अपनी आंखे छोटी कर उन दोनों को घूरते हुए कहता है मां और बेटे मिलकर मेरा मजाक उड़ा रहे है ठीक है

"This is not fair dransh तुम्हे तो मेरी टीम में होना चाहिए after all you're boy तो तुम्हे नहीं लगता कि तुम्हे डैड की टीम में होना चाहिए

द्रांश डैड मै तो ऑलवेज आप की टीम में रहता हूं तभी तो जब मम्मा गुस्सा होती है आप मेरी हेल्प से उन्हें मना लेते है

अभय hmm I impressed with you और इसी के साथ वो दोनों एक दूसरे को हाई फाई देते है

कुछ टाइम बाद अभय कार रोकता है और वो लोग कार से उतर कर सामने बने एक टेंपल में जाते है टेंपल में पहुंच कर वो लोग पूजा करते है वहां के पंडित जी साधना को रक्षा सूत्र देते है

साधना वो रक्षा सूत्र अपने हाथ में लेकर अपने फोरहैंड से टच कर द्रांश के हाथ में बांधने लगती है पर तभी द्रांश अपने डैड की आवाज सुन कर भाग कर वहां से चला जाता है और उसके इस तरह अचानक जाने से वो रक्षा सूत्र वहीं जमीन पर गिर जाता है और इसी के साथ द्रांश की नींद टूट जाती है

आंखे खुलते वो देखता है वो लॉक अप में है और उसके सामने एक कॉन्स्टेबल खड़ा होता है जिसके हाथ में पानी से भरा एक बर्तन होता है और वो दूसरी बार वो पानी द्रांश पर फेंकता है और चिल्ला कर कहता है साले तेरे बाप का बंगला नहीं है ये जो तू आराम फरमा रहा है लॉक अप है ये और यहां हर मुजरिम को सजा मिलती है तुझे भी मिलेगी चल उठ पहले अपना ये हुलिया बदल ये हीरो वाले कपड़े की जगह एक कैदी के कपड़े पहन

द्रांश अपने हाथ से अपना फेस पोंछता है और अपनी जगह से उठ कर खड़ा हो जाता है पर उसके बॉडी पर लगी चोट के कारण अभी भी उसकी हालत ठीक नहीं हुई थी वो कॉन्स्टेबल खींच कर उसे वहां से ले जाता है

कुछ देर बाद द्रांश वहां के बाकी कैदियों की तरह मुजरिम के कपड़ो में होता है

वो कॉन्स्टेबल द्रांश को ले जाकर कहता है चल अब लग जा काम में वो उसे झाड़ू थमा देता है और वहां सफाई करने को कहता है

द्रांश भी चुपचाप वहां सफाई करने लगता है सफाई कंपलीट करने के बाद कॉन्स्टेबल उसे किचेन में ले जाते है जहां वो बाकी लोगों के साथ में खाना बनाने में हेल्प करता है इस बीच कई बार उसे चोट लगती हैं कभी उसका हाथ जल जाता है तो कभी सब्जी काटते हुए कट जाता है पर जैसे तैसे वो अपना काम करता है खाना देख उसे भी बहुत तेज भूख लग गई थी

काफी टाइम से उसे भी कुछ खाने को नहीं मिला था थकान भूख और उस पर उसके बॉडी पर लगे जख्म ने उसकी हालत खराब कर रखी थी पर वो चाह कर भी कुछ नहीं कर सकता था खुद के लिए

उसे अपना सिर घूमता हुआ महसूस होता है पर वो खुद को संभालते हुए जमीन पर बैठ जाता है तभी वहां एक रौबदार आवाज सुनाई देती है

ओ हीरो चल उठ वहां से और अपनी थाली लेकर लाइन में लग यहां तेरे बाप का नौकर नहीं आएगा तुझे खाना सर्व करने चल उठ

द्रांश जिसकी आंखों थकान और दर्द से बंद हो रही थी वो एक बार फिर से जबरदस्ती अपनी आंखों को खोल के उठता है और वहां रखी थालियों में से अपने लिए थाली लेता है और बाकी कैदियों की तरह जा कर लाइन में खड़ा हो जाता है और उसे भी खाना मिल जाता है

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