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Chapter 5

रघु जैसे द्रांश को दूसरी बार पुश करता उससे पहले द्रांश एक जोर का पंच उसके मुंह पर जड़ता है जिससे उसका चेहरा दूसरी तरफ झुक जाता हैं

रघु कुछ रिएक्ट करता उससे पहले द्रांश लगातार उसके मुंह पर मुक्के बरसाने लगता है जिससे उस आदमी के मुंह से खून आने लगता है

रघु भी खुद को बचाने के लिए अपने हाथ में पकड़ी थाली द्रांश को मारता है पर वो थाली द्रांश को लगती उससे पहले द्रांश उसे पकड़ लेता है और उल्टा उस थाली से ही रघु को मारने लगता है उसे देख कर ऐसा लग रहा था जैसे आज वो अपना सारा गुस्सा और नफरत रघु पर निकाल रहा हो उसका चेहरा लाल हो गया था और उसकी आंखों की धारियां भी लाल हो गई थी वो भले 18 साल का था पर इस वक्त वो बेहद ख़तनाक लग रहा था

ऐसा लग रहा था जैसे उसके सर पर खून सवार हो उसे देख कर ऐसा लग रहा था जैसे आज वो अपने अंदर भरे दर्द नफरत और सारी तकलीफ को अपने गुस्से के रूप में बाहर कर रहा हो

द्रांश जो कि रघु पर भारी पड़ रहा था पर तभी वहां पर एक बार फिर वो रौबदार आवाज सुनाई देती है ये सब क्या हो रहा है ये आवाज किसी और की नहीं उस जेलर की थी

द्रांश रघु पर अपना गुस्सा उतारते हुए उसे जम कर कूटने में लगा था उस आवाज को सुनते ही द्रांश का पंच उसके चेहरे के पास ही रुक जाता है रघु के सिर और नाक से ब्लड आ रहा होता है पर जेलर की आवाज सुन और द्रांश का रुका हुआ हाथ और उसके गुस्से से लाल चेहरे उसकी आंखों में भरी नफ़रत को देख कर रघु के चेहरे पर एक शातिर मुस्कान आ जाती है

रघु द्रांश के पंच को अपनी मुट्ठी में भर कर उसका हाथ नीचे करते हुए अपनी धीमी आवाज में कहता है बच्चे तू अभी बहुत छोटा है मेरे सामने तभी वो जेलर अपने तेज कदमों से उन दोनों के पास पहुंच जाता है और एक बार फिर से अपनी भारी आवाज में चिल्लाते हुए कहता है ये क्या गुंडागर्दी कर रहा है तू

द्रांश अपनी नज़रे घुमा कर जेलर की तरफ देखता है जेलर उसे रघु से दूर हटने का ऑर्डर देता है पर द्रांश के कानों में तो जैसे उसकी आवाज ही न गई हो वो वैसे ही खड़ा होता है और अभी भी अपने एक हाथ से उस आदमी का गला पकड़े हुए था

जेलर अब द्रांश को कोई रिएक्ट करते नहीं देखता तो अपने कॉन्स्टेबल को उन्हें अलग करने का इशार करता है जेलर का इशारा पाते ही कॉन्स्टेबल जल्दी से भाग कर उनके पास आ कर उन्हें एक दूसरे से अलग करते है

रघु वही जमीन पर गिर जाता है क्योंकि द्रांश ने कुछ ही देर में उसकी हालत खराब कर दी थी भले ही ये चाल उसने खेली थी पर कहीं न कहीं द्रांश जो कि उसकी चाल से अंजान था पर उसके बाद भी उसने आज रघु पर अपना गुस्सा उतारने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी शायद वो जेलर यहां न आता तो द्रांश उस आदमी को जान से ही मार देता

जेलर अपने कॉन्स्टेबल से कह कर रघु को मेडिकल रूम में भेजता है फिर वो द्रांश की तरफ देखता है जिसके चेहरे से अभी भी गुस्सा खत्म नहीं हुआ था उसकी आंखों की धारियां अभी भी लाल थी और कॉन्स्टेबल उसे पकड़ रखे थे

जेलर द्रांश की तरफ अपने कदम बढ़ाते हुए कहता है बहुत अकड़ है न तेरे अंदर चल आज मै तेरी सारी अकड़ निकाल दूंगा तेरे रहीस बाप ने तुझे कुछ ज्यादा ही सिर पर चढ़ा रखा है

जेलर कॉन्स्टेबल की तरफ देख कर द्रांश को वहां से ले जाने को कहता है कॉन्स्टेबल द्रांश को ले जाकर एक दूसरे लॉक अप में बंद कर देते है कुछ देर बाद जेलर उस लॉक अप में आता है

वो कॉन्स्टेबल द्रांश को एक दूसरे लॉक अप में बंद कर देते है थोड़ी देर बाद जेलर उस लॉक अप में एंट्री करता है वो द्रांश को अपनी आंखों के सामने बंधा हुआ पता है

वहीं दूसरी तरफ रानावत मेंशन में मालती अपने बेड पर बैठी थी और अभय भी बेड पर उसके सामने बैठा हुआ था वो धीरे से कहता है मालती फिर वो अपना एक हाथ उसके हाथ पर रखते हुए कहता है मालती आई नो द्रांश ने जो किया वो बहुत गलत है बल्कि मुझे तो घिन आती है उसे अपना बेटा कहने में मैने कभी भी नहीं सोचा था कि वो इतना बिगड़ जाएगा मेरे और साधना के संस्कारों को ऐसे शर्मसार करेगा

पर कानून ने उसे उसकी गलतियों की सजा दे दी है अब तुम खुद को क्यों ऐसे सजा दे रही हो मै जानता हूं कि तुम्हे बहुत ज्यादा हर्ट हुआ है आखिर वो साधना की तरह तुम्हारा भी तो बेटा है साधना ने उसे जनम दिया है पर पिछले 8 साल से तुमने भी तो उसे कितना प्यार किया है साधना की कमी को पूरी करने की कितनी कोशिश की है

मानता हूं नई शायद द्रांश साधना की जगह किसी को नहीं देख सकता पर तुम कोई और नहीं हो तुम तो उसकी मासी और मां दोनों ही हो और तुमने उसे हमेशा अपने बच्चे की तरह पाला है

साधना जब हमें छोड़ कर हमेशा हमेशा के लिए इस दुनिया से गई तब हमारा द्रांश सिर्फ 10 साल का एक छोटा मासूम बच्चा था

मै जानता हूं उसे हमेशा साधना की कमी महसूस होती रही है उसकी गोद उसकी आवाज को वो हमेशा मिस करता है और शायद हम में से कोई भी उसके लिए साधना की कमी पूरी नहीं कर सकता मै भी अपने बच्चे का ध्यान नहीं रख पाता था

अभय अपनी बात कहते हुए एकदम से चुप हो जाता है क्योंकि उसकी आंखों के सामने वो पल आ रहा था जब साधना की मौत हुई थीं

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