
अभय अपनी बात कहते हुए चुप हो जाता है क्योंकि उसकी आंखों के सामने पल रहा था जब साधना की मौत हुई थी
फ्लैशबैक
साधना की बॉडी लिविंग एरिया में थी द्रांश उसके बेजान शरीर से लिपटा हुआ था उसके आंखों से आंसू बह रहे होते हैं पर वो बिल्कुल चुप था जैसे गहरा सदमा लगा हो उसकी आंखे साधना के चेहरे को देख रही होती है
वहीं अभय की नम आंखे भी साधना और द्रांश पर टिकी थी कुछ टाइम बाद साधना के अंतिम संस्कार का समय हो चुका था मालती जो कि साधना की चाची की बेटी है वो द्रांश के पास आ कर उसे उठाते हुए कहती है द्रांश बेटा अब मम्मा को जाने दो उनके जाने का टाइम आ गया है न आओ बेटा कहते हुए वो द्रांश को उठाने लगती है पर मालती की बात सुन कर साधना से अलग होने की जगह उससे और ज्यादा लिपट जाता है और चिल्ला कर कहता है नहीं कोई मेरी मम्मा को कही नहीं ले जाएगा वो मेरे पास रहेगी
तभी द्रांश की नानी उसके पास आकर उससे रोते हुए कहती है बेटा अब तुम्हारी मम्मा तुम्हारे पास नहीं रह सकती उन्हें जाना होगा
द्रांश कुछ नहीं कहता बस चुपचाप साधना की बॉडी से लिपटा रहता है
मालती और साधना की मम्मी उसे साधना से दूर करने की कोशिश करते है पर वो किसी भी कीमत पर साधना से अलग नहीं होता साधना की मम्मी से द्रांश की हालत देख कर और ज्यादा रो पड़ती है
तभी अभय आगे कर द्रांश के पास बैठ उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहता है द्रांश तुम मम्मा के गुड बॉय हो न तो क्या तुम नानी की बात नहीं मानोगे फिर मम्मा तुमसे गुस्सा हो जाएगी
द्रांश जल्दी से उठ कर अभय के गले लग कर कहता है डैडी प्लीज़ मम्मा को कहीं मत जाने दो प्लीज़ डैडी सब को कह दो मम्मा को कहीं नहीं ले जाए मै उनके बिना नहीं रह पाऊंगा प्लीज़ डैडी मै आप की सारी बात मानूंगा मैं कभी आप को और मम्मा को परेशान नहीं करूंगा मैं अच्छे से स्कूल जाऊंगा अपना होम वर्क खुद करूंगा मम्मा को कभी परेशान नहीं करूंगा अगर आप मुझे हॉस्टल भेजना चाहते थे न मै चला जाऊंगा
पर आप उनको कहीं नहीं जाने देना आप उन्हें बोलो कि वो उठ कर अपने द्रांश से बात करे मुझे प्यार करे मै प्रॉमिस करता हूं मैं अपनी मम्मा की सारी बात मानूंगा हमेशा अपनी मम्मा का गुड बॉय बन कर अच्छे से स्टडी करूंगा
पर आप मम्मा को बोलो वो उठ जाए वो मेरी बात नहीं सुन रही है फिर वो अभय से अलग हो कर अपने कान पकड़ कर घुटने के बल बैठ कर अपने कान पकड़ कर कहता हैं मम्मा आप मुझसे गुस्सा हो न ठीक है अब से आप जो भी कहेगी मैं आप की सारी बात मानूंगा
द्रांश की मासूमियत देख कर अभय द्रांश की नानी और नाना रो पड़ते है अभय द्रांश को गले लगा कर रोते हुए कहता है I'm sorry beta पर आप की मम्मा अब किसी की बात नहीं मानेंगी द्रांश अभय से लिपट कर फुट फुट कर रो रहा होता है
तभी वहां मौजूद लोग साधना की बॉडी को ले जाने लगते है और अभय द्रांश को उसकी नानी और मालती को संभालने को बोल कर जाने लगता है पर जैसे अभय सब के साथ जाने लगता है द्रांश अपनी नानी से खुद को छुड़ा कर भाग के अभय के पास आ कर अपने छोटे छोटे हाथों को अभय की कमर पर लपेट कर उससे चिपक जाता है और रोते हुए कहता है प्लीज़ डैडी मुझे भी अपनी मम्मा के साथ जाना है मैं भी जाऊंगा
अभय जो कि बहुत मुश्किल से खुद को संभाल रहा था वो द्रांश को ले जाने करने लगता है पर द्रांश की नानी द्रांश को ऐसे अपनी मां के लिए रोते तड़पते देख कर अभय से उसे साथ ले जाने को बोल देती है
अभय नहीं मां वो ये सब नहीं देख पाएगा
द्रांश की नानी बेटा साधना के आखरी समय पर कुछ देर के लिए ही सही द्रांश को उसकी मां के पास रहने दो ये आखिरी समय है आज के बाद मेरा बच्चा अपनी मां के बिना कैसे रहेगा उसे जाने दो बेटा
अभय उनकी बात सुन कर हां में सिर हिला देता है और द्रांश को अपने फ्रेंड की गोद में दे कर उसे आगे ले कर चलने को बोलता है और खुद साधना के पास आ कर उसे एक साइड से कंधा देता है
कुछ देर बाद साधना की बॉडी का अंतिम संस्कार हो रहा होता हैं और अभय और द्रांश को उसकी चिता को अग्नि देना होता है
पर द्रांश इस हाल में नहीं था कि वो ऐसा कुछ कर सके वो वही रोते हुए सब कुछ देख रहा होता है अभय का फ्रेंड अभी भी उसे गोद में लिए होता है
पर जैसे अभय साधना की चिता को अग्नि देने को होता है द्रांश खुद को छुड़ा कर दौड़ कर अभय के पास आ जाता है और उसका हाथ पकड़ कर कहता हैं डैडी ये आप क्या कर रहे है मम्मा जल जाएगी
अभय का फ्रेंड अभय के पास आ कर द्रांश को गोद में उठा लेता है और उसे लेकर अभय से दूर हो जाता है पर द्रांश खुद को छुड़ाने के लिए छटपटा रहा होता है और जोर से चिल्ला कर कहता है डैडी प्लीज़ आप ऐसा नहीं कर सकते मै कभी आप से बात नहीं करूंगा मुझे मेरी मम्मा चाहिए डैडी नहीं प्लीज़ डैडी उसे ऐसे रोता बिलखता देख कर हर किसी को उसके लिए बहुत ज्यादा बुरा लग रहा होता है
द्रांश के नाना उसके पास आ कर उसे अपने गले लगा लेते है अपनी बेटी के जाने के दुख में वो भी टूट गए थे और साथ ही अपने नाती का दर्द उनसे देखा नहीं जा रहा था उन्हें नहीं समझ आ रहा था कि वो उस 10 साल के बच्चे को कैसे संभाले वही द्रांश अपने नाना जी के गले लगे हुए अभय की तरफ देखते हुए कहता है डैडी प्लीज़ आप ऐसा नहीं करो मेरे मम्मा जल जाएगी डैडी वो अपने नाना से कहता है नानू प्लीज़ आईं रिक्वेस्ट यू मेरी मम्मा पर तभी अभय साधना की चिता को आग लगाता है और इसी के साथ द्रांश एकदम शांत हो जाता है उसके मुंह से एक शब्द नहीं निकल रहा होता हैं बस वो साधना की जलती चिता को देख रहा होता है




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