
अभय जैसे साधना की चिता को आग लगाता है द्रांश एकदम चुप हो जाता है वो एकदम चुप हो कर साधना की जलती हुई चिता को देख रहा होता है पर उसकी आंखों से अभी भी आंसू बह रहे होते है
और इसी के साथ अभय अपने उस ख्याल से बाहर आ जाता है ये सब याद आते उसकी आंखे फिर से नम हो जाती है वो अपने आंसू साफ करते हुए कहता है उस दिन के बाद मैने कभी अपने बेटे को मुस्कराते हुए नहीं देखा उसे देख कर ऐसा लगता है जैसे उस दिन मैने सिर्फ साधना को नहीं अपने बेटे को भी खो दिया
मै उसे टाइम नहीं दे पाता था उसे वो प्यार वो केयर नहीं दे पाता था इसलिए सोचा कि तुम जब इस घर में आओगी तो शायद एक बार फिर से मेरा द्रांश हंसने मुस्कराने लगे साधना को तो मै वापस नहीं ला सकता पर कम से कम तुम उसकी परछाई बन कर ही मेरे द्रांश के पास रहोगी
पर मै गलत था जों ये सोचता था कि मेरा द्रांश मेरा बेटा कभी मुझे वापस मिल सकता है सच तो ये है वो अब मेरा बेटा द्रांश नहीं हैं उस दिन मैने साधना को ही नहीं बल्कि अपने बेटे को भी खो दिया था
मुझे नहीं पता कि वो अब इतना गिर चुका है तुम्हारे लिए उसने अपने दिल में इतना जहर पाल रखा कि वो इस हद तक गिर गया कि अपनी
तभी मालती अभय को पीछे से हग कर के कहती है अब आप ये सब भूल जाए मै नहीं चाहती कि ये सब याद कर के आप अपने आप को परेशान करे हां मुझे द्रांश के लिए बुरा लग रहा है क्योंकि वो मेरी बहन का बेटा है और मेरे लिए वो मेरा अपना बच्चा ही है पर उसने जो किया मैं वो सब भूल नहीं पा रही अपनी बात कहते हुए वो अभय पर अपनी पकड़ कसते हुए रोना स्टार्ट कर देती है
अभय उसके आंसू अपनी शर्ट पर महसूस करते पलट के उसे हग कर लेता है और फिर धीरे से कहता है एक सजा उसे कानून ने दी है पर एक सजा उसे मै दूंगा वो अब मेरा बेटा नहीं है और ये बात मै उसे बता दूंगा वो क्या सोचता है कि इतनी बड़ी गलती करके भी वो मुझे डैड कहने का हक रखता है नहीं मै हमेशा के लिए उससे ये हक छीन लूंगा अब मेरा सिर्फ एक बेटा है विक्रांत
मै चाहता था कि मेरे बाद मेरी कंपनी का दूसरा चेयरमैन मेरा बेटा द्रांश बने क्योंकि ये मेरी साधना का सपना था वो द्रांश को मेरी परछाई मानती थी वो हमेशा कहती थी को वो मेरे जैसा एक सक्सेसफुल बिज़नेस टायकून होगा पर अफ़सोस की मेरी साधना का सपना कभी पूरा नहीं होगा
तभी मालती अभय से थोड़ा फिर हो उसके फेस को देखते हुए कहती है आप ऐसा क्यों कह रहे है विक्रांत को मैने जरूर जनम दिया है पर वो भी तो आपका और दीदी का बेटा है साधना दीदी तो उसकी बड़ी मां है द्रांश की जगह पर विक्रांत आप की कंपनी का चेयरमैन बनेगा तों क्या साधना दीदी का सपना नहीं पूरा होगा विक्रांत भी तो आप की परछाई है
अभय क्यों नहीं होगा साधना जहां भी होगी उसे द्रांश की वजह से बहुत तकलीफ पहुंची होगी पर वो भी यही चाहती होगी कि मैं अपनी जिम्मेदारी एक सही हाथ में दूं
मालती अब वापस से अभय को हग कर लेती है
अभय भी उसे हग कर लेता है फिर उससे अलग होकर कहता है अब तुम कुछ खा को मै उस क्रिमिनल से मिलने जा रहा हूं
मालती पर क्यों
अभय मैने जो भी गलती की उसे सुधारने खैर तुम सारी प्रिपरेशन कर लो अब हम यहां नहीं रहेंगे
मैने हमारे ऑस्ट्रेलिया जाने का सारा अरेंजमेंट कर दिया है हम आज रात ही वहां के लिए निकल रहे है
मालती जी मै विक्रांत को मां के घर से बुला लेती हूं
वही दूसरी तरफ जेलर उस लॉक अप में पहुंच कर द्रांश के पास जाता है जो कि बंधा हुआ था जेलर उसके पास जा कर उसके बालों को पकड़ उसकी आंखों में देखते हुए कहता है तू अपने आप को बहुत बड़ा हीरो समझता है न आज मै तेरी सारी हीरोगिरी निकाल दूंगा आज मै तुझे अच्छे से ये बताऊंगा कि एक क्रिमिनल को सजा कैसे दी जाती है और तेरे रहीस बाप की औलाद होने के घमंड को चूर चूर कर दूंगा
द्रांश जेलर की आंखों में देखते हुए चुपचाप उसकी बातो को सुन रहा होता हैं
जेलर अब उसके बालों को झटके से छोड़ कर उससे एक दो कदम पीछे हो कर अपनी बेल्ट निकलता है फिर वो द्रांश को बेल्ट दिखा कर कहता है आज मै तुझे तेरी औकात दिखाऊंगा आज तुझे समझ आएगा कि अमीर घर में जनम लेने से तुझे कुछ भी करने का लाइसेंस नहीं मिल गया है इसी के साथ वो द्रांश के शरीर पर अपनी बेल्ट की छाप छोड़ने के लिए जैसे अपने हाथ ऊपर उठता है तभी एक कॉन्स्टेबल वहां आ कर कहता है
कॉन्स्टेबल सर आप से मिलने के लिए मिस्टर अभय सिंह रानावत आए है
ये नाम सुनते जेलर के चेहरे के भाव और ज्यादा सख्त हो जाते है वो गुस्से से जलती हुई आंखों से एक नजर द्रांश को देखता है और गुस्से से अपनी बेल्ट को लगा कर वहां से निकल जाता है
द्रांश जिसके चेहरे पर एक उम्मीद की झलक दिखाई देने लगती है अपने डैड का नाम सुनते उसके मन में एक ही ख्याल आता है कि शायद डैड को सब पता चल गया और अब वो उसे यहां से लेने आए है वो अभी ये सब सोच रहा था
जेलर अपने केबिन में आता है सामने अभय को देखता है जो कि चेयर पर बैठा होता है जेलर भी आ कर चेयर पर उसके सामने बैठते हुए कहता है कहिए मिस्टर रानावत कैसे आना हुआ
अभय मै द्रांश से मिलने आया हूं मिस्टर विशाल शेखावत
विशाल हम्मम मिल सकते है
फिर वो अपने केबिन के बाहर खड़े एक कॉन्स्टेबल को बुला कर कहता है मिस्टर रानावत को उस नये कैदी द्रांश से मिलवा दो




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